अंग्रेज़ी की क्लास
जब आप किसी महफ़िल में या दोस्तों के ग्रुप में अच्छी अंग्रेजी बोल लेते हो तो आपका रुतबा बढ़ना स्वाभाविक है। याद कीजिए आपका कोई मित्र अंग्रेजी में बात करने में झिझक दिखाएं तो उसकी बात का असर बहुत कम हो जाता है । मेरा भी यही हाल था । लेकिन मैं उस समय 5 या 6 वर्ष का ही था । यही समय था जब मुझे एक अंग्रेजी स्कूल में दाखिला मिल गया । तब मैं बड़ी मुसीबत में फँस गया । क्लास में अंग्रेजी के टीचर से करीब करीब रोज ही स्केल की मार हथेली पर झेलता । फिर एक दिन मेरी इस मुसीबत का किस्सा घर तक भी किसी ने पहुंचा दिया । हमारे दादाजी को यह गवारा नहीं की खुद विलायत से शिक्षित होते हुए भी मैं ऐसी स्थिति में था । तभी एक दिन जब स्कूल की छुट्टी थी, दादाजी ने मुझे अंग्रेजी के संसार में प्रवेश कराने की ठान ली। घर का बड़ा आंगन और बीच में एक कुर्सी पर दादाजी बैठ गए और मुझे अपने पास जमीन पर बिठा दिया। पास ही एक गिलास, छतरी और भी न जाने क्या-क्या रख लिया। हाथ में बेंत का होना तो जरूरी था ही । बस मेरी अंग्रेजी की शिक्षा शुरू हो गई ।
हर एक चीज पर बेंत रख कर पूछते व्हाट इस दिस, और उन्होंने एक-एक करके हर एक वस्तु के अंग्रेजी नाम बताना शुरू किया । बीच-बीच में बेंत का भी भरपूर उपयोग होता रहा । रोना तो मना था ही । चौक में चारों ओर मेरी मां, दादी, चाचा-लोग, पिताजी आदि सब बैठे हुए मेरी हालत पर रहम खा रहे थे । फिर भी कोई कुछ नहीं बोल पा रहा था । व्हाट इस दिस का सिलसिला काफी समय तक चलता रहा । फिर भगवान की कृपा से दादाजी को बाहर जाने का कोई काम याद आ गया । वे अपने कमरे में चले गए परंतु मुझे भी साथ ले गए । अब कक्षा का दूसरा भाग आरंभ हुआ । व्हाट इस दिस मैंने कहा इट इस ए हैट । व्हाट इस दिस, जवाब था इट इस ए शर्ट । यह सिलसिला चलता रहा । जब तक दादाजी घर के बाहर नहीं चले गये । अब घर वालों ने भी चैन की सांस ली और मुझे उसी दिन से लगा कि समाज में ही नहीं बल्कि पढ़ाई में भी अंग्रेजी का महत्व बहुत है परिणाम स्वरुप आगे के जीवन में उस दिन की अंग्रेजी क्लास मेरे बहुत काम आई ।
Beautiful description of your initial encounter with English, Nana
ReplyDeleteपढ़ कर खूब आनंद आया। What is this की क्लास बड़ी मजेदार और फायदेमंद साबित हुई। पापा जी, आपको बधाई, आपने, what is this, की अंग्रेजी क्लास से अपना पहला ब्लॉग लिखा। :)
ReplyDeleteWonderful piece! Though I wish he hadn't got beaten up. Hope to read more such stories in the future.
ReplyDeleteWow..uncle aapne toh meri kahani suna di ...
ReplyDeleteSuperb writing. ऐसे ही और किस्से लिखिए। हम जानना चाहते हैं। पढ़कर सीखने को मिला।
ReplyDeleteअत्यंत रोचक वि जीवंत वर्णन किया है आपने। अंग्रेज़ी की कक्षा हमारे विद्यालय के प्रधानाध्यापक ख़ुद पढ़ाते थे, उन्हें पूरी आज़ादी थी छात्रों को दण्ड देने की। दादाजी का अंग्रेज़ी की शिक्षा English Newspaper से देते थे, शुरुआत Headlines से की बाद में complete article तत्पश्चात् अर्थ BBC की county wide classroom, इस तरह सबके योगदान से English कुछ निपुण हुए।
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